तुम••••

 "' तुम ,'तुम' ना रहे तो कैसे भला समझे तुम्हें ?
चाहत मे तुम्हारी ऐसे खोए थे हम ,
अब बताओ तो कैसे ढुंढू तुम्हे ?

यू तो तुम खुश होंगे ना बेहद क्योंकि तुम्हारे मिजाज 
ही बदल गए हैं, 
हमें घूरो ना ऐसे ,हम थोडेही जिम्मेदार हैं तुम्हारे बदलाव के लिए!

आप तो बडीही शातिर हो फितरत भी ऐसी बेशक 
बदली ,की हम दंग रह  गए तुम्हे देखकर!
कुछ सबूत तो छोड़ा होता तुमने अपना जिससे पहचान लेते तुम्हे! 

तुम सच में बदल चुके हो,क्योंकि तुम्हारी नजर में अब 
हम कुछ भी नहीं हैं! 
बताओ तो इतना गलत हमने किया क्या हैं?
दोस्ती ही तो हैं या भला कोइ सजा हैं? 
यार लगता है,
कभी इतना भी न कोइ बदले की आपकी सारी 
अच्छाइया ही भूल जाए!

कम ही सही लेकिन कभी दिलसे तारीफ तो करे दिलसे!
लेकिन  आपसे हम आखिर  क्यूँ यह उम्मीद रखे?
आप तो हमसे जलने में ही मश्गूल है!
जरा बाहर आइए अपनी इस जहरीली सोच से तो आप को हमारी सच्चाई साफ नजर आए  शायद!

फिर भी खुश हूँ   'तुम' तुम   ना रहे तो क्या हुआ?
हम तो भाई 'हम' हैं    और अपने अंदर छिपे हुए सच्चे
इन्सान को हम खुद खोने नहीं देंगे!"
                        
                         -कुणाल विजय ठाकरे।



























  



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